सन्त कबीर साहेब

कबीर दास

मनुष्य परमात्मा प्राप्ति के लिए सदियों से भटक रहा है।
सब कहते है परमात्मा एक है। लेकिन ये कोई नही जानता कि वो एक परमात्मा कौन है ❓
सभी धर्मों में पाखंडवाद चरम पर है। सभी अपने धर्म/सम्प्रदाय को श्रेष्ठ मानते है। लेकिन अपने पवित्र सद्ग्रन्थों को छोड़ सब मनमुखि साधना करके अपने जीवन को व्यर्थ नष्ट करने में लगे है। जबकि ये
मानुष जन्म दुर्लभ है मीले न बारम्बार।
जैसे तरुवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लगता ड़ार।।
मानुष जन्म पाय कर, जो नही रटे हरि नाम।
जैसे कुआ जल बिना, बनवाया क्या काम।।

परमात्मा प्राप्ति के चक्कर मे भोली आत्माएं गलत मार्ग में भटक जाती है। इसलिए स्वार्थी लोगो का दांव लग जाता है। यही कारण है कि आज हम जाती - धर्म के नाम पर बटे हुए है। जबकि हम सब एक ही परमात्मा की संतान है। हमारी आत्मा परमात्मा प्राप्ति के लिए तड़पती है इसलिए नकली सन्तो की शरण मे जाकर नकली भक्ति कर इस अनमोल जीवन को बर्बाद कर लेते है। कई भोली आत्माएं घर त्याग देती है।
लेकिन वास्तव में उनको न आत्म ज्ञान होता है, और न ही परमात्म ज्ञान।


पूर्ण परमात्मा कौन है❓ इसकी जानकारी तो हमारे पवित्र सद्ग्रन्थों तथा जिन महान सन्तो ने परमात्मा पाया उनके प्रमाण से ही प्राप्त हो सकती है।

आइये पहले जानते है हमारे पवित्रसद्ग्रन्थ क्या कहते है?

गीता में प्रमाण - गीता अध्याय 8 श्लोक 9 में पूर्ण परमात्मा का नाम कविम् बताया है।
कुरान में प्रमाण - कुरान शरीफ सूरत फुर्कानि 25 आयत 52, 58, 59 में परमात्मा काम कबीर/ खबीरा/ कबीरन है।
गुरूग्रंथसाहिब में प्रमाण - गुरूग्रंथसाहिब साहिब राग तिलंग महला 1 पृष्ठ 721 - हक्का कबीर करीम तू बैएब परवरदिगार,
राग सिरी महला 1 पृष्ठ 24 - धाणक रूप रहा करतार
बाइबिल में प्रमाण - अय्यूब 36: 5 में El is Kabir (परमेश्वर कबीर शक्तिशाली है)
वेद में प्रमाण- वेदों में में कई जगह परमेश्वर कबीर साहेब के प्रमाण है। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मन्त्र 17, 18, 19, 20
ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 90 मन्त्र 3, 4, 5, 15, 16
यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 26, 30
यजुर्वेद अध्याय 29 मन्त्र 25
सामवेद संख्या 359 अध्याय 4 खण्ड 25 श्लोक 8
सामवेद संख्या 1400 अध्याय 12 खण्ड 3 श्लोक 5
अथर्वेद कांड 4 अनुवाक 1 मन्त्र 1 से 7
जिन सन्तो को परमात्मा मिले -
गरीब दास जी : -
अनंत कोटि ब्रह्मण्ड का, एक रति नहीं भार।
सतगुरू पुरूष कबीर हैं, ये कुल के सृजनहार।।
हम सुल्तानी नानक तारे, दादू को उपदेश दिया।
जात जुलाहा भेद न पाया, काशी माही कबीर हुआ।।
सतगुरु पुरुष कबीर है चारों युग प्रमाण
झूठे गुरुवा मर गए हो गए भूत मसाण।।
नानक देव जी : -
खालक आदम सिरजिआ,आलम बड़ा कबीर।
क़ाइम दाइम कुदरती, सिर पीरा दे पीर।।
संत रविदास जी : -
साहेब कबीर शमर्थ हैं, आदि अंत सर्वकाल।
ज्ञान गम्या से दे दिया, कहे रैदास दयाल।।
संत नाभा दास जी : -
वाणी अरबों खरबों ,ग्रंथ कोटी हजार।
करता पुरुष कबीर है, रहे नाभे विचार।।
संत गोरख नाथ जी : -
नौ नाथ चौरासी सिद्धा, इनका अंधा ज्ञान।
अविचल ज्ञान कबीर का, यो गति बिरला जान।।
दादू जी : -
जिन मोकू निज नाम दिया, सोई सतगुरू हमार।।
दादू दूसरा कोई नहीं, वो कबीर सृजनहार।।
और संत सब कूप है केते झरिता नीर।
दादू अगम अपार है दरिया सत्य कबीर।।
स्वामी रामानंद जी : -
तुम स्वामी मैं बालक बुद्धि, धर्म-कर्म किए नाश।
कहे रामानंद विज ब्रह्म तुम, हमरा दृढ़ विश्वास।।
बोलत रामानंद जी, सुनो कबीर करतार।
गरीबदास सब रूप में, तुम ही बोलनहार।।
संत धर्मदास जी : -
बाजा बाजा रहित का, परा नगर में जोर।
सतगुरु खसम कबीर हैं, नजर न आवे और।।
600 वर्ष पहले परमात्मा स्वयं आये थे अपने वास्तविक नाम से जिन्हें हम सन्त कबीर दास जी की नाम से जानते है।
जानिए कबीर परमात्मा ने अपने बारे में क्या कहा है
कबीर, राम कबीरा एक है, दूजा कबहू ना होय।
अंतर टाटी कपट की, ताते दीखै दोय।।
🌱कबीर राम कबीरा एक है, कहन सुनन कूं दोय।
दो करि सोई जानिए, सतगुरू मिला ना होय।।
कबीर, हम कर्ता सब सृष्टि के,हम पर दूसर नाहीं।
कहें कबीर हम ही चीन्हें, नहीं चौरासी जाहिं।।
अवधू अविगत से चलि आया।
मेरा कोई भेद मर्म ना पाया।।
ना मेरा जन्म ना गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।
काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहां जुलाहे कूं पाया।।
मात-पिता मेरे कछु नाहीं, ना मेरे घर दासी(पत्नी)।
जुलहे को सूत आन कहाया, जगत करे मेरी हासी।।
हाड चाम लहू ना मोरे, जाने सतनाम उपासी।
तारन तरन अभय पद(मोक्ष) दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।।
कबीर, हम ही अलख अल्लाह है, कुतुब गौस और पीर।।
गरीबदास खालिक धणी, हमरा नाम कबीर।।
कबीर, ना हमरे कोई मात-पिता, ना हमरे घर दासी।
जुलाहा सुत आन कहाया, जगत करै मेरी हाँसी।।
कबीर, पानी से पैदा नहीं, श्वासा नहीं शरीर।
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर।।
कबीर, ना हम जन्मे गर्भ बसेरा, बालक होय दिखलाया।
काशा शहर जलज पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।।
कबीर, सतयुग में सत्यसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनीन्द्र मेरा।
द्वापर में करूणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया।।
कबीर, चारों युग मे सन्त पुकारे, कूक गया हम हेल रे।
हीरे मोती माणिक बरसैं, यह जग चुगता ढेल रे।।
कबीर, अरबों तो ब्रह्मा गये, उन्नचास कोटि कन्हैया।
सात कोटि शम्भू गये, मोर एक पल नहीं पलैया।।
कबीर, नहीं बूढा नहीं बालक, नहीं कोई भाट भिखारी।
कहै कबीर सुन हो गोरख, यह है उम्र हमारी।।
कबीर, पाँच तत्व का धड नहीं मेरा, जानू ज्ञान अपारा।
सत्य स्वरूपी नाम साहिब का, सो है नाम हमारा।।
कबीर, हाड- चाम लहू नहीं मेरे, जाने सत्यनाम उपासी।
तारन तरन अभय पद दाता, मैं हूँ कबीर अविनाशी।।
कबीर, अधर द्वीप ( सतलोक ) भँवर गुफा, जहाँ निज वस्तु सारा।
ज्योति स्वरूपी अलख निरंजन(काल/ब्रह्म) भी, धरता ध्यान हमारा।।
कबीर, जो बूझे सोई बावरा, क्या है उम्र हमारी।।
असंख्य युग प्रलय गई, हम तब के ब्रह्मचारी।।
कबीर, हम कर्ता सब सृष्टि के,हम पर दूसर नाहीं।
कहें कबीर हम ही चीन्हें, नहीं चौरासी जाहिं।।

लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब/ असली राम/ अल्लाह/रब/Supreme God की जानकारी तो कोई तत्वदर्शी सन्त/बाख़बर इल्मवाला ही बताएगा : -
गीता अध्याय 4 श्लोक 34
कुरान शरीफ सूरत फुर्कानि 25 आयत 59
यजुर्वेद अध्याय 40 मन्त्र 10
वर्तमान में वह तत्वदर्शी सन्त
जगतगुरु तत्वदर्शी सन्त रामपाल जी महाराज है।
जीव हमारी जाती है, मानव धर्म हमारा।
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई, धर्म नही कोई न्यारा।।
अधिक जानकारी के लिए देखे साधना चेनल 7:30 pm
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