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Immortal Lord Kabir

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गीता अध्याय 2 श्लोक 17 में जिस अविनाशी परमेश्वर के बारे में बताया है वो परमात्मा कबीर परमेश्वर है। उस अविनाशी का नाश करने में कोई समर्थ नहीं है। केवल कबीर परमेश्वर ही अविनाशी हैं उनका नाश नहीं होता। कबीर परमात्मा चारों युगों में आते है। सशरीर आते है फिर लीला करके सशरीर जाते है। परमेश्वर कलयुग में अपने वास्तविक नाम कबीर देव के नाम से आए हैं। शेख तकी जो दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी का धार्मिक पीर था, ने सिकंदर लोदी को कबीर परमेश्वर के खिलाफ भड़काया। क्योकि कबीर साहेब ने सब पाखण्डी पण्डो, काजी मुल्लो के अज्ञान की पोल खोल दी थी। इसलिए कबीर साहेब को मारने के षड्यंत्र 52 बार रचे। लेकिन वे तो अविनाशी परमात्मा थे। उनका बाल भी बांका न कर सके।  उनको गर्म तेल के कढ़ाई में डालने को कहा और कहा यदि वह नहीं मरे तो हम उन्हें भगवान मान लेंगे। कबीर परमेश्वर उबलते तेल में इस तरीके से बैठ गए जैसे कि शीतल जल में बैठे हो। जब सिकन्दर लोदी ने अंगुली डाली तो उनकी अंगुली जल गई। सिकंदर लोधी ने कबीर जी के हाथों में हथकडि़याँ लगाई, पैरों में बेड़ी तथा गले में तौक डाली और आदेश दिया नौका में बैठाकर ...

Kabir is God

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कबीर साहेब ने मगहर से सशरीर सतलोक जाते समय हिन्दू-मुसलमानों के बीच होने वाले भयँकर युद्ध को टाल दिया था, तथा सबको आपस में मिलकर रहने की प्रेरणा की। Kabir is God जिस समय कबीर परमेश्वर मगहर से सशरीर अपने धाम सतलोक को चले गए और उनके शरीर की जगह सुगन्धित फूल बन गए तब वहाँ हिन्दू मुसलमानों को पूर्ण विश्वास हुआ था कि कबीर साहेब पूर्ण परमात्मा है। तहां वहां चादरि फूल बिछाये, सिज्या छांडी पदहि समाये।दो चादर दहूं दीन उठावैं, ताके मध्य कबीर न पावैं।। जब कबीर साहेब सतलोक जा रहे थे तब कबीर परमात्मा ने कहा कि एक चद्दर नीचे बिछाओ, एक मैं ऊपर ओढ़ूँगा। थोड़ी देर बाद आकाशवाणी हुई कि, उठा लो पर्दा, इसमें नहीं है मुर्दा। जो वस्तु मिले, उसे आधी-आधी बांट लेना परन्तु लड़ना मत। जब चद्दर उठाई तो सुगंधित फूलों का ढेर शव के समान ऊँचा मिला।जिसे लेकर हिंदू-मुस्लिम दोनों ने एक एक यादगार बनाई और दोनों के बीच एक साझला द्वार भी हैं। तहां वहां चादरि फूल बिछाये, सिज्या छांडी पदहि समाये। दो चादर दहूं दीन उठावैं, ताके मध्य कबीर न पावैं।। जब कबीर साहेब सतलोक जा रहे थे तब कबीर परमेश्वर ने कहा कि एक...

Universal Soldiers

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देश का फौजी : एक फौजी देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा देता है। बाकी देशवाशियो से भी निवेदन है कि एक फौजी का जीवन जीना चाहिए। जन्मदिन, सालगिराह, वेलेंटाOइन, मृत्युभोज, जीवहत्या, रिस्वतखोरी, राजनीति, नशाखोरी, झूठ, पांखण्ड, महिलाओं पर उल्टे सीधे कमेंट इत्यादि काम तो मूर्ख भी कर लेते है। अब ये सोचो आप देश के लिए क्या कर रहे हो? आप बिना बॉर्डर पर गए भी देश सेवा कर सकते हो, एक फौजी की तरह बन के रह सकते हो। देश मे चोरी, रिश्वत, भ्रष्टाचार, जाती धर्म का भेदभाव, नशाखोरी, हत्या, बलात्कार, दुराचार, अश्लीलता जैसी बुराइयों को बढ़ावा देने वाले कई आतंकवादी भरे पड़े है। वे आतंकवादी अपने ही देश के है। अब क्या इनको रोकने के लिए भी देश का फौजी ही आएगा। "शूरा के मैदान में, कायर का क्या काम। कायर भागे पीठ दे, शूरा करे संग्राम।।" "या तो माता भगत जने, या दाता या शूर। या रहे बाँझड़ी, क्यो व्यर्थ गवाएं नूर।।" हमें भी फौजी की तरह बन कर रहना होगा। बुराईयों O खत्म करने के लिए प्रयास करना होगा। अपनी सोच के दायरे को बढ़ाना होगा।तभी हमारा देश विश्वगुरु बनेगा। भारत फिर से सोन...

सन्त कबीर साहेब

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कबीर दास मनुष्य परमात्मा प्राप्ति के लिए सदियों से भटक रहा है। सब कहते है  परमात्मा एक है । लेकिन ये कोई नही जानता कि वो एक परमात्मा कौन है ❓ सभी धर्मों में पाखंडवाद चरम पर है। सभी अपने धर्म/सम्प्रदाय को श्रेष्ठ मानते है। लेकिन अपने पवित्र सद्ग्रन्थों को छोड़ सब मनमुखि साधना करके अपने जीवन को व्यर्थ नष्ट करने में लगे है। जबकि ये मानुष जन्म दुर्लभ है मीले न बारम्बार। जैसे तरुवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लगता ड़ार।। मानुष जन्म पाय कर, जो नही रटे हरि नाम। जैसे कुआ जल बिना, बनवाया क्या काम।। परमात्मा प्राप्ति के चक्कर मे भोली आत्माएं गलत मार्ग में भटक जाती है। इसलिए स्वार्थी लोगो का दांव लग जाता है। यही कारण है कि आज हम जाती - धर्म के नाम पर बटे हुए है। जबकि हम सब एक ही परमात्मा की संतान है। हमारी आत्मा परमात्मा प्राप्ति के लिए तड़पती है इसलिए नकली सन्तो की शरण मे जाकर नकली भक्ति कर इस अनमोल जीवन को बर्बाद कर लेते है। कई भोली आत्माएं घर त्याग देती है। लेकिन वास्तव में उनको न आत्म ज्ञान होता है, और न ही परमात्म ज्ञान। पूर्ण परमात्मा कौन है❓  इसकी जानकारी तो हमारे पव...